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गहने भी करते है उपचार

गहने भी करते है उपचार

Rekha Kalpdev
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जो महिलाएं केवल स्वर्णाभूषण पहनती हैं, उनमें उष्णता धारा अधिक होती है| वे स्थाई रूप से रोगिणी हो सकती हैं। केवल सोना पहनने से पित्त की अधिकता होगी। सिर और पांव दोनों में स्वर्णाभूषण पहनने से मस्तिष्क और पैरों में समान गर्म ऊर्जा प्रवाहित होगी, जिससे जातक रोगग्रस्त हो सकता है। यही नहीं आभूषणों में अन्य धातु के टांके से भी धारा गड़बड़ा जाती है लेकिन टांके में अन्य धातु का मेल आवश्यक है लेकिन इसमें जिस धातु का गहना है, उसका मिश्रण अधिक हो तो रोग रहित होंगे। ऊर्जा प्रवाह की गड़बड़ में परिणाम विपरीत होता है। यदि सोने में चांदी की मिलावट हो तो गर्म व ठंडे का मिश्रण से अन्य प्रकार की धारा बन सकती है। अत: सोने के पतरे का खोल बनवा कर भीतर चांदी, या जस्ते की धातुएं भरवा कर कड़े, हंसली आदि आभूषण से रोग पैदा होते हैं, ऊर्जा का प्रवाह हमेशा किनारों से प्रवेश होता है। अत: मस्तिष्क के दोनों भागों को ऊर्जा प्रभाव से प्रभावशाली बनाने के लिए नाक और कान में सोना पहनना चाहिए। सोने की बालियां या झुमके पहनने से स्त्रियों में स्त्री रोग, मासिक धर्म संबंधी अनियमितता, कान के रोग, हिस्टीरिया, डिप्रेशन में लाभ होता है।


  • सोने की बालियां या झुमके न पहनने से स्त्रियों में स्त्री रोग, कान के रोग, डिप्रेशन, व हीन भावना होने की संभावना अधिक बढ़ने की संभावना होती है ।
  • हाथ में सोने, चांदी या तांबे की धातु धारण करने से हाथ-पैरों का दर्द जाता रहता है। मानसिक, व ह्रदय संबंधी रोगो से बचा जा सकता है व यश, मान-सम्मान व निर्णेय क्षमता बढती है ।
  • जिन्हें समय पर यश, मान-सम्मान नहीं मिले या ह्रदय संबंधी रोग हों, ऐसे जातकों को अनामिका में सोने या तांबे की धातु धारण करनी चाहिए |
  • जो कोई भी मध्यमा अंगुली में लोहे या काले घोड़े की नाल की अंगूठी पहनता है तो ऐसे जातक को रोग, नजर, तांत्रिक अभिकर्म में लाभ मिलता है |
  • जिनका मोटापा अधिक है या वजन बढ़ रहा हो ऐसे जातकों को मध्यमा में रांगे की अंगूठी धारण करनी चाहिए |
  • जिन जातकों के हाथ-पैरों में दर्द रहता है, वे हाथ में सोने या चांदी का कड़ा धारण करें इससे लाभ होगा |
  • जो जातक निम्न रक्तचाप से परेशान रहते हों, उन्हें भुजा पर तांबे का कड़ा धारण करना चाहिए |
  • जिन जातकों के कमर या पेट के रोग हों, वे कमर में सोने, तांबे या चांदी की कनकती धारण करें, लाभ मिलता है |
  • धातु ग्रह-क्लेश को भी नियंत्रित कर सकता है। जो जातक दाम्पत्य कलह के शिकार हों, उन्हें चांदी की चेन या अंगूठी धारण करनी चाहिए |
  • जो व्यक्ति मानसिक अशांति के कारण अवसाद में हों वे चांदी, तांबा, स्वर्ण धातु से निर्मित छल्ला पहनें तो लाभ मिलेगा |
  • जातक चंद्र पीडि़त है या मानसिक कष्ट, कफ, फेफड़े का रोग, तन से परेशान हो तो नाक में चांदी का छल्ला डालना लाभ देता है |
  • बच्चों को टोटकों से बचाने या दांत आसानी से निकलने के लिए हाथ-पैर में लोहे या तांबे का छल्ला, गले में चंद्र या सूर्य बना कर पहनाने चाहिएं |
  • जो जातक मूत्र रोग से पीडि़त हों वे रेशम का सफेद धागा या चांदी का कड़ा बाएं पैर के अंगूठे में बांधें तो लाभ मिलेगा |
  • जिन स्त्रियों के स्नायु तंत्र, गला व कंठ संबंधी रोग हो, वे हाथ के अंगूठे में छल्ला पहनें तो शीघ्र लाभ मिलने लगता है |
  • विश्व के पहले शल्य चिकित्सक सुश्रुत के अनुसार यदि कानों में छिद्र करके सोने या जस्ते की बालियां पहन ली जाय तो आंत उतरने, पसली का रोग लगने की संभावना नहीं रहती |
  • सोना मिलना और गुमना दोनों अशुभ होता है ।
  • अक्सर लोग सोना तिजोरी में, अलमारी में या लॉकर में रखते हैं। सोना जहां भी रखे उसे लाल कपड़े में बांधकर रखे। इससे बृहस्पति को मंगल की सहायता मिलने लगेगी और आपकी समृद्धि बढ़ती जाएगी।
  • सोना घर के ईशान या नैऋत्य कोण में रखेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा।
  • सोने के साथ नकली आभूषण या लौहा न रखें। कुछ लोग सिक्के रख देते हैं तो यह भी उचित नहीं। ऐसा करने से बृहस्पति अशुभ होकर अपना शुभ प्रभाव देना छोड़ देता है।
  • सोने को सोते वक्त सिरहाने न रखें। बहुत से लोग अपनी अंगुठी या चैन निकालकर तकिये के नीचे रख देते हैं। इससे नींद संबंधी समस्या तो होगी ही साथ अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है।

आभूषणों का प्रयोग आदिकाल से पूरे संसार में होता आ रहा है, व समय-समय पर आभूषणों का रंग-रूप, आकार-प्रकार बदलते रहे है, परन्तु इसकी चाह, आकर्षण, उपयोगिता, व महत्व में कमी नहीं हुई है |


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