शुक्र का गोचर

शुक्र का गोचर

शुक्र ग्रह एक राशि में लगभग 26 दिन तक रहता है, लेकिन वक्री होने की स्थिति में 40 से 50 दिन तक का समय भी लगा लेता है और फिर दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है। शुक्र का गोचर क्या होता है, शुक्र का गोचर कितने समय तक रहता है और यह गोचर आपको और आपकी राशि को किस प्रकार प्रभावित करता है, आइए जानते हैं।

शुक्र का गोचर क्या होता है?

शुक्र ग्रह  का एक राशि से दूसरी राशि में गमन विभिन्न राशियों में शुक्र का गोचर कहलाता है। लगभग 26 दिन तक रहता है, लेकिन वक्री होने की स्थिति में 40 से 50 दिन तक का समय भी लगा लेता है और फिर दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है। इसलिए एक वर्ष में इसके गोचर की संख्या परिवर्तित होती रहती है। एक वर्ष में शुक्र के न्यूनतम सात और अधिकतम 13 गोचर हो सकते हैं। विभिन्न राशियों के व्यक्तियों पर इसका भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ता है। शुक्र ऐसा ग्रह है जो कभी भी सूर्य से दो राशियों से दूर नहीं जाता। गोचर का शुक्र विभिन्न भावों में अलग-अलग फल प्रदान करता है और व्यक्ति के भौतिक और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है।

कितने समय तक चलता है, शुक्र का गोचर?

शुक्र एक राशि में कम से कम 23 दिन और अधिकतम 50 दिन व्यतीत करता है। फिर यह दूसरी राशि में गोचर करता है। इसका तात्पर्य है कि शुक्र एक वर्ष में कम से कम 7 और अधिकतम 13 राशियां परिवर्तित करता है, और व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है।

कैसे प्रभावित करता है, आपको शुक्र का गोचर ?

भारतीय वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र आकर्षण और प्रेम के प्रतीक है। आपकी कुंडली में ग्रह स्थिति बेहतर होने से बेहतर फल प्राप्त होते हैं। शुक्र मुख्यतः स्त्रीग्रह, कामेच्छा, रूप सौंदर्य, आकर्षण, धन संपत्ति, व्यवसाय आदि सांसारिक सुखों के कारक है। शुक्र को कला, प्रेम, सौंदर्य, वैवाहिक, वाहन समेत अन्य भौतिक सुखों का कारक माना गया है इसलिए कुंडली में इसकी शुभ स्थिति होने से व्यक्ति को समस्त सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं। वहीं शुक्र के कमजोर होने से वैवाहिक जीवन में तनाव, सांसारिक सुखों में कमी, आर्थिक स्थिति में गिरावट और किडनी रोग समेत कई परेशानियां आती हैं। शुक्र ग्रह को वृषभ और तुला राशि का स्वामित्व प्राप्त है। वहीं मीन राशि में शुक्र उच्च का होता है और कन्या राशि में यह नीच भाव स्थिति होता है। शनि, बुध और राहु-केतु शुक्र के मित्र ग्रह हैं। वहीं बृहस्पति के साथ शुक्र शत्रुता का भाव रखता है। शुक्र का मित्र राशि में गोचर व्यक्ति को धन और रिश्तों के सम्बन्ध में प्रेम, रोमांस और विलासिता के साधन प्राप्त करना आदि जैसे कई बेहतर परिणाम देता है। हालांकि, शुक्र का शत्रु राशि में गोचर धन, सौंदर्य, प्रेम संबंध, जीवनसाथी, माता के साथ संबंध, रचनात्मक क्षमता आदि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

विभिन्न राशियों पर शुक्र के गोचर का प्रभाव -

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, नवम, एकादश और द्वादश भाव में शुक्र गोचर के समय शुभ फल प्रदान करता है लेकिन षष्ठम और अष्टम भाव में इसके फल निराश करने वाले होते हैं। एक से दूसरी राशि में गोचर करने पर शुक्र के गोचर का हर एक राशि पर भिन्न प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक राशि में शुक्र के गोचर का एक व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। यह मुख्य तौर पर विलासिता, सांसारिक सुखों, सुंदरता और व्यक्ति के जीवन में स्त्री से संबंधित कारकों पर प्रभाव डालता है। विभिन्न राशियों में शुक्र के गोचर का प्रभाव पढ़ने लायक होगा। आइये जानते हैं विभिन्न राशियों में शुक्र के गोचर का फल-

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Dr. Arun Bansal

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