राहु का गोचर

भारतीय ज्योतिष में राहु के राशि परिवर्तन को राहु का गोचर कहा जाता है। यह प्रत्येक राशि में लगभग डेढ़ वर्ष अर्थात 18 माह की अवधि तक गोचर करता है। शनि और बृहस्पति के बाद राहु ही एक ऐसा ग्रह है जिसकी गोचरीय अवधि भी अधिक होती है। गोचर का राहु हर राशि के भिन्न-भिन्न भावों में स्थित होकर मनुष्य के जीवन को प्रभावित करता है। आइये जानते हैं कि राहु का गोचर क्या है, यह एक राशि में कितने समय तक रहता है और राहु का गोचर अलग-अलग राशि को कैसे प्रभावित करता है।

राहु गोचर का क्या अर्थ है?

जब राहु ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में विराजमान होते हैं या यूं कहें कि राशि परिवर्तन करते हैं तो उसे हम विभिन्न राशियों में राहु का गोचर कहते हैं। राहु का गोचर लगभग डेढ़ वर्ष अर्थात 18 माह में एक राशि में होता है, इसका अर्थ यह है कि 2 वर्ष में 3 राहु के गोचर होते हैं।

कितने समय के लिए रहता है, राहु का गोचर? 

ज्योतिष में राहु एक पापी ग्रह है जैसा कि हमने पहले बताया था कि राहु ग्रह एक चंद्र राशि में 18 माह तक रहता है। इसके पश्चात राहु दूसरी राशि में गोचर करते हैं। कभी भी राहु एक साथ दो वर्ष तक गोचर नहीं करते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु का गोचर भी एक महत्वपूर्ण गोचर है, जो किसी व्यक्ति के जीवन के 18 माह के दौरान दोनों लाभकारी और हानिकारक प्रभाव डालता है।

आपको कैसे प्रभावित करता है, राहु का गोचर?

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह की संज्ञा दी गई है। राहु उस असुर का कटा हुआ सिर है जो सूर्य और चंद्र ग्रहण करता है। राहु को वैदिक ज्योतिष में क्रूर ग्रह कहा गया है, इसलिए राहु का नाम सुनते ही व्यक्ति के मन में भय और नकारात्मक भाव आने लगता है। राहु को मायावी विद्या, लॉटरी, जुआ, बुद्धि को भ्रमित करने वाला और झूठ बोलने वाला आदि बातों का कारक माना जाता है। इसके अतिरिक्त राहु राजनीति और कूटनीतिक संबंधों का कारक भी होता है। जन्म कुंडली में राहु के मजबूत स्थिति से व्यक्ति को राजनीतिक, कूटनीतिक, विदेश यात्रा के अवसर और जोखिम भरे कार्यों में बड़ी सफलता मिलती है। वहीं राहु के बुरे प्रभाव से अचानक बड़ी हानि का सामना करना पड़ता है। राहु के अशुभ प्रभाव से मानसिक रोग और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। वहीं राहु से शुभ प्रभावों से व्यक्ति को गूढ़ विद्या और मायावी शक्तियों का अच्छा ज्ञान होता है।

राहु के गोचर का अन्य चंद्र राशियों पर प्रभाव-

ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह कहा गया है। अन्य ग्रहों की भांति राहु को किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। यह वृषभ राशि में उच्च भाव में रहता है तथा वृश्चिक राशि में यह नीच भाव में रहता है। राहु शनि, शुक्र और बुध से मित्रवत भाव रखता है। वहीं सूर्य, चंद्रमा, मंगल और गुरु से राहु शत्रुता का भाव रखता है। गोचर का राहु तृतीय, षष्टम, दशम और एकादश भाव में शुभ फल देता है। वहीं द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, अष्टम, नवम और द्वादश भाव में राहु सामान्यतः अच्छे फल प्रदान नहीं करता है। राहु के गोचर के शुरू में जो भी आपके साथ घटित होता है, वही आप अगले आने वाले डेढ़ वर्ष तक देखते हैं। यही कारण है कि जब इस गोचर की शुरुआत होती है तो आपको किसी अच्छे ज्योतिष से मिलने की सलाह दी जाती है। आइये जानते हैं राहु के गोचर का विभिन्न चंद्र राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में

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