मंगल का गोचर

मंगल का गोचर

मंगल का गोचर कई मायनों में महत्वपूर्ण है, मंगल ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना। मंगल ग्रह की गोचरीय अवधि करीब डेढ़ माह की होती है यानि यह प्रत्येक राशि में लगभग 45 दिन तक संचरण करता है। इस अवधि में मंगल ग्रह प्रत्येक राशि के अलग-अलग भावों में स्थित होकर मानव जीवन को प्रभावित करता है।

मंगल के गोचर का क्या अर्थ है?

मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है। यह ऊर्जा, साहस, पराक्रम और रक्त आदि का कारक कहा जाता है। मंगल का एक राशि से दूसरी राशि में गमन करना, मंगल का गोचर कहलाता है। मंगल का यह गोचर स्वाभाविक रूप से एक वर्ष में आठ से नौ बार होता है, जो लगभग 72 वर्षों में मंगल ग्रह की गति पर निर्भर करता है। विभिन्न राशियों के जातकों पर इसका भिन्न प्रभाव पड़ता है।

मंगल का गोचर कितने समय तक चलता है?

मंगल को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामित्व प्राप्त है। कर्क एवं सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल एक योग-कारक ग्रह है। मंगल ग्रह लगभग 45 दिनों तक एक राशि में रहता है। फिर यह दूसरी राशि में गोचर करता है। 45 दिनों के बाद प्रत्येक 9 राशियों को परिवर्तन के मायने है कि मंगल का गोचर एक वर्ष में लगभग 9 बार होता है।

मंगल का गोचर आपको कैसे प्रभावित करता है?

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में मंगल को क्रूर ग्रह माना गया है। जन्म कुंडली में मंगल के शुभ प्रभाव से भूमि लाभ, भाई-बहन से सुख, नौकरी और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। मंगल एक ऐसा ग्रह है जो पराक्रम, उग्रता और छोटे भाई को दर्शाता है। यह ईमानदारी, साहस, उद्यमी प्रकृति, रणनीति नियोजन की प्रतिभा और गतिशीलता का भी प्रतीक है। परन्तु यह अविवेकी, नष्ट करने या तोड़ने की प्रवृत्ति और आवेग का भी प्रतीक है। इसलिए सकारात्मक मंगल का गोचर एक व्यक्ति को लाभ के लिए उपरोक्त लक्षणों का उपयोग करने में सहायता करता है। परन्तु मंगल की कमज़ोर स्थिति व्यक्ति को जीवन के उपरोक्त लक्षणों से वंचित कर देगा। यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में मंगल स्थित होता है तो कुंडली में मांगलिक दोष उत्पन्न हो जाता है, जिसे विवाह और वैवाहिक सुख में बड़ी समस्या का कारण माना जाता है।

विभिन्न चंद्र राशियों पर मंगल के गोचर का प्रभाव -

जन्मकालिक चन्द्रमा को लग्न मानकर कुंडली में मंगल विभिन्न 12 भावों और राशियों में रहकर अलग-अलग परिणाम देता है। मंगल ग्रह जातक के भाई-बहनों के साथ उसके रिश्ते को भी प्रदर्शित करता है। प्रत्येक राशि में मंगल के गोचर का जातक पर अलग-अलग प्रभाव होता है। मैंने अपने लेखों में प्रत्येक राशि में मंगल के इन गोचर के प्रभाव के विषय में बताया है। आइये जानते हैं कुंडली के हर भाव में मंगल के गोचर का क्या फल होता है।

मंगल का धनु राशि में गोचर

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