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चंद्र ग्रहण 2018

चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रतिच्छाया में आ जाता है। ऐसे में सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण हमेशा साथ-साथ होते हैं तथा सूर्यग्रहण से दो सप्ताह पहले चंद्रग्रहण होता है। सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण। ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए यह समय को अशुभ माना जाता है। इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं जो एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करती हैं, इसलिए ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस समय चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं। भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं।

ग्रहण का सीधा संबंध राहु-केतु से माना गया है। ज्योतिष के अनुसार राहु, केतु को अनिष्टकारण ग्रह माना गया है। चंद्रग्रहण के समय राहु और केतु की छाया सूर्य और चंद्रमा पर पड़ती है। ऐसी मान्यता है कि इस कारण सृष्टि इस दौरान अपवित्र और दूषित को हो जाती है। जिसे उपायों, दान, धर्म और पवित्र सरोवरों में स्नान के द्वारा शुद्ध किया जा सकता हैं।

chandra grahana 2018

साल 2018 में होने वाले चंद्रग्रहणॊं की जानकारी इस प्रकार हैं-

पहला चन्द्र ग्रहण: 31 जनवरी, 2018

  • ग्रहण का समय - सायं 16:21 से 21:38 तक, कुल 5 घंटे 17 मिनट का ग्रहण रहेगा।
  • ग्रहण किन स्थानों में दिखाई देगा - एशिया, आस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, पश्चिमी उत्तर अमेरिका, भारत।
  • भारत में दिखाई देगा।

पढ़ें: 31 जनवरी को होने वाले चंद्र ग्रहण का समस्त 12 राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव

सूतक काल

चंद्रग्रहण हालांकि 31 जनवरी को चंद्रोदय समय 17:58 बजे से आरंभ होगा लेकिन लेकिन इसका सूतक का समय प्रात: 7 बजकर आरंभ हो जायेगा। जो कि रात्रि 09 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। बच्चों एवं बुजूर्गों के लिये सूत्तक मध्यरात्रि 12 बजकर 30 मिनट से आरंभ होकर ग्रहण समाप्ति के समय तक रहेगा।

दूसरा चन्द्र ग्रहण: 27-28 जुलाई, 2018

  • ग्रहण का समय - 22:44 रात्रि से 04:58 मिनट तक रहेगा, कुल 6 घंटे 14 मिनट का ग्रहण रहेगा।
  • ग्रहण किन स्थानों में दिखाई देगा - दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, आस्ट्रेलिया, भारत।
  • भारत में दिखाई देगा।

पढ़ें: 27-28 जुलाई को होने वाले चंद्र ग्रहण का समस्त 12 राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव

2018 में चंद्र ग्रहण

दिनांकग्रहण का प्रकार
31 जनवरी 2018पूर्ण
27-28 जुलाई 2018पूर्ण

चंद्र ग्रहण, खगोलविदों के लिये विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। रही बात आम लोगों की, तो तमाम लोग इसे एक प्राकृतिक घटना के रूप में देखना चाहते हैं, तो बहुत लोग ऐसे भी हैं, जो इसे धर्म से जोड़ते हैं। खास कर हिंदू धर्म को मानने वाले लोग। जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है तब सूर्य कुछ समय के लिए चंद्रमा के पीछे छुप जाता है। इसी स्थिति को वैज्ञानिक भाषा में सूर्य ग्रहण कहते हैं। ग्रहण को हिन्दू धर्म में शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि ये एक भोगौलिक घटना है, लेकिन ज्योतिषियों के मुताबिक इन ग्रहणों का आपके जीवन पर प्रभाव पड़ता है। इसी कारण ग्रहण के वक्त कुछ जरुरी सावधानियां बरतनी चाहिए-

ग्रहण से जुड़े कुछ मिथक

31 जनवरी, 2018 को इस साल का पहला दृश्य खग्रास चंद्रग्रहण है। ज्योतिषशास्त्र में इसकी अपनी मान्यता है जो ग्रहण का कारण राहु केतु को मानता है। शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण का समय सिद्धियों और मनोकामनाएं पूरी करने के लिए बहुत ही उत्तम समय होता है। इसलिए ग्रहण के समय खाने-पीने या विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ मौज मस्ती करने की बजाय अपनी मनोकामना पूरी करने में लगाना शुभ कहा गया है। ग्रहण के समय को लेकर शास्त्रों में ग्रहण के समय स्त्री पुरुषों के लिए कई नियम बताए गए हैं। इनमें सबसे पहला नियम यह है कि स्त्री पुरुष को ग्रहण की अवधि में रति क्रिया और प्रेमालाप से बचना चाहिए।

इस दौरान काम वासना को मन से दूर रखकर ईश्वर का ध्यान चिंतन करना शुभ होता है। जो स्त्री पुरुष रति क्रिया करते हैं उन्हें मृत्यु के बाद नर्क की यातना भोगनी पड़ती है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण की अवधि में गर्भवती स्त्रियों को घर में ही रहना चाहिए, क्योंकि इसका बुरा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। ग्रहण के समय गर्भवती स्त्री को कैंची, चाकू या किसी धारदार वस्तु से कोई चीज काटने से बचना चाहिए। सिलाई का काम भी इस समय करना ठीक नहीं होता। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर पर जन्म से ही कटे और सिले का निशान आ जाता है। ग्रहण काल में चन्द्र के प्रभावों को शुभ करने के लिये चन्द्र की वस्तुओं का दान किया जाता है।

ग्रहणॊं के समय किए जाने वाले मिथकों का वैज्ञानिक आधार

हमारे ऋषि मुनियों ने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिए मना किया है क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। खाद्य वस्तु, जल आदि में सुक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसीलिए ऋषियों ने पात्रों में कुश डालने को कहा है ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है ताकि कीटाणु मर जाएं।

ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसीलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर उष्मा का प्रवाह बढ़े, भीतर बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं और धुलकर बह जाएं। ग्रहण के दौरान भोजन न करने के विषय में जीव विज्ञान विषय के प्रोफेसर टारिस्टन ने पर्याप्त अनुसंधान करके सिद्ध किया है कि सूर्य चंद्र ग्रहण के समय मनुष्य के पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिसके कारण इस समय किया गया भोजन अपच, अजीर्ण आदि शिकायतें पैदा कर शारीरिक या मानसिक हानि पहुंचा सकता है।

भारतीय धर्म विज्ञानवेत्ताओं का मानना है कि सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण लगने के 12 घंटे पूर्व से ही इसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है। अंतरिक्षीय प्रदूषण के समय को सूतक काल कहा गया है। इसीलिए सूतक काल और ग्रहण के समय में भोजन तथा पेय पदार्थो के सेवन की मनाही की गई है। चूंकि ग्रहण से हमारी जीवन शक्ति का ह्रास होता है और तुलसी दल में विद्युत शक्ति व प्राण शक्ति सबसे अधिक होती है इसीलिए सौर मंडलीय ग्रहण काल में ग्रहण प्रदूषण को समाप्त करने के लिए भोजन तथा पेय सामग्री में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दिए जाते है। जिसके प्रभाव से न केवल भोज्य पदार्थ बल्कि अन्न, आटा आदि भी प्रदूषण से मुक्त बने रह सकते है।

पुराणों की मान्यता के अनुसार राहु चंद्रमा को तथा केतु सूर्य को ग्रसता है। ये दोनों ही छाया की संतान हैं। चंद्रमा और सूर्य की छाया के साथ-साथ चलते हैं। चंद्रग्रहण के समय कफ की प्रधानता बढ़ती है और मन की शक्ति क्षीण होती है, जबकि सूर्य ग्रहण के समय जठराग्नि, नेत्र तथा पित्त कमजोर पड़ती है। गर्भवती स्त्री को सूर्य चंद्रमा ग्रहण नहीं देखने चाहिए, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन सकता है। गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है जिससे कि राहु केतु उसका स्पर्श न करें। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को कुछ भी कैंची या चाकू से काटने को मना किया जाता है और किसी वस्त्रादि को सिलने से रोका जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते है या फिर सिल जाते हैं।

ग्रहण के समय करने योग्य उपाय

  • चंद्रग्रहण में बालक, वृद्ध और रोगी के लिए कोई नियम शास्त्रों में नहीं बताया गया है।
  • चीटियों को पिसा हुआ चावल व आट्टा डालें।
  • चन्द्र की दान वस्तुओं में मोती, चांदी, चावल, मिसरी, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करना शुभ रहेगा।
  • कुंडली के अनुसार चन्द्रमा को मन और माँ का कारक माना गया है जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में हो उसके अनुसार दान करना चाहिए।
  • चन्द्र वृष राशि में शुभ और वृश्चिक राशि में अशुभ होता है, जब चन्द्र जन्म कुण्डली में उच्च का हो तब चन्द्र से सम्बन्धित वस्तुओं का दान नही करना चाहिए, अगर चन्द्र द्वितीय या चतुर्थ भाव में हो तो चावल, चीनी व दूध का दान न करें।
  • यदि चन्द्र वृश्चिक राशि में हो तो चन्द्र की शुभता प्राप्त करने के लिए मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्धारा, शमशान या आम जनता के लिए प्याउ (पानी की टंकी) बनवाए या किसी मिटटी के बर्तन में चिड़ियों के लिये पानी रखें।
  • चंद्रमा के शुभ प्रभाव प्राप्त करने हेतु चंद्रमा के वैदिक मंत्र का 11000 जप करना चाहिए।
  • ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः ”या ” ऊँ सों सोमाय नमः ।
  • चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीडि़त होने पर चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। शिव जी की आराधना करें। अपने श्री इष्ट देवता का जाप करें।

ग्रहण काल में करने योग अन्य उपाय

ग्रहण से पहले नहा कर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर ”ऊँ कीली कीली स्वाहा” मंत्र का 54 बार जप करे, अब इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक के दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को बुझाकर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें। इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।

चंद्र ग्रहण के दिन हनुमानजी का विशेष पदार्थों से अभिषेक लाभकारी होगा। इस दिन एक दोने में चार लड्डू गुलाब के फूलों से ढक कर ऊपर मसल के पान में दो लौंग लगाकर हनुमानजी के चरणों में अर्पित करने बहुत प्रकार के दुखों का नाश होता है।

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