व्ृद्गिचक
यह मास आपके लिए उत्तरार्द्ध की अपेक्षा पूर्वार्द्ध में अधिक सकारात्मक रहेगा। सगे-संबंधियों, इष्ट मित्रों की ओर से सहयोगात्मक व्यवहार बढ़ेगा। सामाजिक कार्यों में सावधानी पूर्वक सहभागिता निभाएं। शत्रुपक्ष गुप्तरूप से आपकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखेंगे।
स्वास्थ्य :
मास के उत्तरार्द्ध में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। खाने-पीने की वस्तुओं में संयम रखें। रक्त से संबंधित बीमारियों के प्रति सावधान रहें। तनाव से बचें।
धन-सम्पत्ति :
आर्थिक क्षेत्र में मास के मध्य से भविष्य के लिए अच्छे संकेत प्राप्त होंगे। आप अपनी बुद्धि-विवेक से आर्थिक स्थिति में सुधार करेंगे। संपत्ति संबंधी कार्यों में सावधानी पूर्वक अंतिम निर्णय लें। किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें।
कार्य-व्यवसाय :
कार्यक्षेत्र में आनेवाली परेशानियों के प्रति पहले से ही सावधान रहें। व्यापार करने वाले लोगों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। अधिक वाद-विवाद से बचें।
प्रेम-संबंध :
प्रेम-संबंधों में प्रगाढ़ता आयेगी। परस्पर सुख-सहयोग में वृद्धि होगी।
दाम्पत्य जीवन :
वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच कुछ मतभेद उभर कर सामने आयेंगे।
उपाय :
मंगलवार के दिन आटा और गुड़ हनुमानजी के मंदिर में दान करें।
स्वास्थ्य कष्ट :
4, 6, 14, 15, 24, 25
वृश्चिक(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
व्यवसाय :
वृश्चिक राशि के जातक साढ़ेसाती के प्रभााव में रहेंगे। वर्ष प्रारंभ में राशि स्वामी मंगल का शुभ स्थान में गोचर आपके कर्म क्षेत्र में नयी शुभता प्रदान करेगा। परंतु शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव के कारण मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयत्न करना पड़ेगा। वर्ष 2013 से राहु आपकी राशि से निकलकर द्वादश भाव में गोचर करेंगे। कार्य व्यवसाय से संबंधित यात्राएं करनी पड़ सकती है। बदली हुई परिस्थिति में आपके समक्ष नयी नीतियों के कारण नये कार्य क्षेत्र उपलब्ध हो सकेंगे।
गुरु का वृष राशि में गोचर आपको उच्च अधिकारियों से परिचय कराएगा। वरिष्ठ लोग प्रसन्न रहेंगे। तरक्की के आसार बनेंगे। व्यवसाय उत्तम व लाभदायक रहेगा। कीर्ति बढ़ाने वाले काम पूरे होंगे। शनि के व्यय भाव में गोचर से कुछ सफलता के प्रतिकूल स्थान परिवर्तन या अस्थायी रूप से बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। व्यवसाय के सिलसिले में लाभकारी यात्राओं के अवसर मिल सकते हैं। कार्य व्यवसाय यदि पार्टनरशिप में है तो यह समय आपके लिए अनुकूल रहेगा। आपसी सामंजस्य एवं समानता के साथ व्यवसायिक प्रगति संभव है।
धन-संपत्ति :
आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा। आपको इस वर्ष पैतृक संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है। भूमि, मकान-जमीन से भी लाभ संभव है। कुछ व्यय की संभावना रहेगी। कुछ विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है। केतु व गुरु का सप्तम में गोचर आपको राज्य से लाभ प्राप्त करा सकता है। व्यापारिक कार्यों में अकस्मात होने वाली बढ़ोत्तरी से उसे धन का विशेष लाभ मिलता है। आपको आर्थिक लाभ उपलब्ध होगा। बड़े-बड़े लोगों से परिचय होगा उनसे लाभ मिलेगा। शेयर सट्टे से दूर रहें।
घर-परिवार-समाज :
परिवार में सुख शांति का वातावरण बनेगा। विवाह योग्य जातकों को शुभ समाचार मिलने की संभावना बनेगी। संतान के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। संतान से थोड़ी चिंता रहेगी। चिकित्सा पर व्यय हो सकता है। भाई-बहनों से संबंध ठीक रहेंगे। माता-पिता से संबंध सामान्य रहेंगे। वर्ष के पूर्वार्द्ध में पत्नी से संबंधों में कटुता आएगी जो कि उत्तरार्द्ध में आते-आते मधुरता में बदल जाएगी। बीच-बीच में कुछ मानसिक परेशानी की संभावना बन रही है। मित्रों से संबंध अच्छे रहेंगे।
स्वास्थ्य :
वृश्चिक में राहु का गोचर अनश्चितता की स्थिति पैदा कर सकता है। आप मोटापा, हड्डी के रोगों, पेट के रोगों व गुप्त रोग से पीड़ित रह सकते हैं। गुरु की लग्न पर दृष्टि स्वास्थ्य में सुधार लाएगी। शारीरिक शक्ति, श्रम वाला कार्य करने से बचें। उच्च रक्तचाप, डाइबिटीस से पीड़ित लोगों को समय-समय पर चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कैरियर एवं प्रतियोगी परिक्षाएं :
शिक्षा की दृष्टि से यह वर्ष मिला जुला फल रहेगा। राहु के कारण याद करके भूलने की प्रवृत्ति बनेगी। आपका रूझान राजनैतिक, तंत्र-मंत्र विद्या, सिद्धि, रोमांचकारी, रिसर्च से जुड़े विषयों में अधिक रहेगा। चिकित्सा क्षेत्र, रसायन, सेना, पुलिस, इलेक्ट्रानिक विषयों से जुड़े लोग रिसर्च व ट्रेनिंग का लाभ उठाएंगे। धार्मिक, गूढ़ विषयों में भी आपकी रुचि जाग्रत होगी। इस वर्ष बड़े बदलाव के ग्रह संकेत हैं। आप अभी जिस कार्य क्षेत्र से जुड़े हैं उसमें परिवर्तन होगा।
यात्रा-प्रवास-तबादला :
आप अचानक धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं। नई कार्य योजनाओं के क्रियान्वयन प्रशिक्षण के सिलसिले में भी आप यात्राएं कर सकते हैं। परिवार के साथ धार्मिक यात्रा का आप अनुभव ले सकेंगे। यात्रा के समय अधिक आहार लेना वायु विकार दे सकता है। सुख-वैभव विलासिता पर भी आप यात्रा के दौरान व्यय कर सकते हैं। विदेश भ्रमण की भी संभावना बन रही है। विशेष अवसर का लाभ उठावें। कई बार यात्राएं थकावट भरी भी हो सकती है। अतः समय पर व्यायाम व योग का लाभ उठावें।
धर्म-कार्य-ग्रह शांति :
उच्च का शनि द्वादश भाव में एवं गुरु ग्रह षष्ठ भाव में धर्म कार्य हेतु यात्रा एवं दान सेवा का योग बनाता है। इस वर्ष शनि शांति हेतु पीपल वृक्ष की पूजा, शनि मंत्र “ऊं शं शनैश्चराय नमः” का जप, शिव मंत्र एवं शिव चालीसा का नित्य पाठ करें। राहु लग्न में होने से दुर्गा मां की आराधना विशेष फलदायी रहेगी। आपको दुर्गा सप्तसती का पाठ करना चाहिए। प्रत्येक शनिवार को इमरती काले कुत्ते को खिलावें। गणेश आराधना करें। गौरी शंकर रूद्राक्ष धारण करें। आपका मूल रत्न मूंगा है। त्रिकोणी मूंगा तांबे की अंगूठी में मंगलवार को शुक्लपक्ष में शुभ मुहूर्त में धारण करें। ऊं अं अंगारकाय नमः मंत्र का जप करें। आपको तत्व विवेचना हेतु अधिकारी संतों का सान्निध्य भी मिल सकता है।