मेष राशि
भौतिक लक्षण:
मध्यम कद, पतला मांसल शरीर, लंबा चेहरा और गर्दन, चौड़ा मस्तक, सिर या कनपटी पर निशान, सुदृढ़ दंतपक्ति, गोल आंखें, घुंघराले बाल।
अन्य गुणः
सौभाग्यशाली वर्ष:
16, 20, 28, 34, 41, 48, 51
कष्टप्रद वर्ष:
1, 3, 6, 8, 15, 21, 36, 40, 45, 56, 63
महत्वाकांक्षी, अग्रणी और उत्साही, अड़ियल मगर स्पष्टवादी, व्यावहारिक, सौंदर्य, कला और सुरुचि प्रेमी। साहसिक, वाद-विवाद में रुचि, झगड़ालू। धार्मिक कट्टरपंथी, धैर्यहीन। जल से डर, भ्रमण प्रिय, प्रारंभिक जीवन में संघर्ष रहते हैं। योजना बनाने में निपुण, कार्यगति तीव्र, प्रशासन में सक्षम। दीर्घकालीन कार्यों में अरुचि। संकट का सामना करने की प्रतिभा परंतु दीर्घकालीन कष्टों से लड़ने में अक्षम। दूरदृष्टि, आदर्शवादी, उचित-अनुचित के मापदंडों का स्वयं निर्माता। लघु स्तर के कार्यों में अरुचि, विशालकाय उद्यमों से लगाव। उत्तम स्वभाव और आकर्षण, विपरीत लिंग के व्यक्ति प्रभावित होते हैं। जीवन का स्वयं निर्माता, कामी, प्रेम प्रसंगों में असफल। गृह और परिवार से लगाव, सदा परिवारजनों के मध्य रहना पसंद करते हैं। घर को साफ-सुथरा रखते हैं। सरकार में उच्च पदों पर आसीन।
संभावित रोग :
सिरदर्द, जलना, तीव्र ज्वर, पक्षाघात, मुंहासे, आधा-सीसी का दर्द, चेचक और स्नायविक व्याधियां। अधिक विश्राम और निद्रा, स्वादिष्ट भोजन और सब्जियों में रुचि।
रत्नों के रखने का स्थान, धातु, अग्नि, खनिज पदार्थ, लाल रंग, पाप राशि, मिलनसार, तुनुक मिजाज, झूठ बोलना, पृष्ठोदय, पुरुष राशि, क्रूर राशि, अग्नि तत्व, रजो गुण, दिनबली होती है।
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मई
2012
मेष
यह मास आपके लिए सामान्य रूप से सुख एवं उन्नतिकारक रहेगा। मास के पूर्वार्द्ध में महत्वपूर्ण कार्यों में संघर्ष रहेगा, उत्तरार्द्ध में अपेक्षाकृत स्थिति सकारात्मक रहेगी। सगे-संबंधियों, इष्ट-मित्रों के साथ तालमेल बढेगा।
स्वास्थ्य :
स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सिर में दर्द, शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आदि की समस्याओं से बचने की कोशिश करें। सकारात्मक सोच को बनाए रखें। नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
धन-सम्पत्ति :
: वाहन, मकान, के क्रय-विक्रय संबंधी कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। इस संबंध में सावधानीपूर्वक कार्य करें। धन के सदुपयोग की ओर ध्यान दें, अन्यथा आर्थिक बजट बिगड़ सकता है।
कार्य-व्यवसाय :
कार्य-क्षेत्र में परिश्रम करने के अनुसार उस अनुपात में फल-प्राप्ति होने की संभावना कम रहेगी। आजीविका में वरिष्ठ सहयोगियों के साथ तालमेल बनाने की आवश्यकता रहेगी।
प्रेम-संबंध :
: अपने प्रेमीजन से अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति सही तरीके से करें। किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचें।
दाम्पत्य जीवन :
पति-पत्नी के बीच पहले से चले आ रहे मतभेद दूर होंगे। पारिवारिक सुख-सौहार्द में वृद्धि होगी।
उपाय :
शुक्रवार के दिन सफेद कपड़े में चावल और चीनी रखकर किसी गरीब स्त्री को दान करें। ऊँ शुं शुक्राय नमः मंत्र का दो माला जप प्रातः काल में करें।
स्वास्थ्य कष्ट :
8, 9, 16, 17
मेष (चू, चे,चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
व्यवसाय :
इस वर्ष आपकी क्रियात्मक व सृजनात्मक क्षमता उत्तम रहेगी। भाग्य भी अच्छा रहेगा। अतः आप अपने भाग्य एवं कर्म द्वारा व्यवसाय में उत्तम रहेंगे। गुरु एवं शनि का शुभ गोचर व राशि स्वामी मंगल की भी शुभ स्थिति वर्ष के पूर्वार्द्ध में न्यून विचारधारा, नयी योजनाओं को जन्म देगी। आप उसका उचित लाभ उठा पाएंगे। कर्म क्षेत्र एवं व्यवसाय क्षेत्र में सफलता मिलेगी। कर्मेश एवं लाभेश शनि उच्च राशि के होकर उच्च पद की प्राप्ति, मनोवांछित स्थान परिवर्तन आदि के योग बनाएंगे। संतान पक्ष से भी शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। आप नए व्यवसाय की शुरूआत कर सकते हैं। लौह, तेल, धातु आदि के व्यवसाय अच्छी उन्नति करेंगे। व्यवसाय के एक से अधिक स्रोत बनेंगे।
धन-संपत्ति :
आपके आर्थिक लाभ अच्छे रहेंगे व उसके साथ-साथ पैतृक धन-संपत्ति मिलने के भी योग बनेंगे। आप इस वर्ष में संपत्ति में निवेश करेंगे तो लाभ कमाएंगे। बैंकिंग संस्थानों से कर्ज, आसान वित्त आदि भी प्राप्त हो सकेंगे। संपत्ति में बढ़ोतरी की भी संभावनाएं बनेंगी। शुभ मांगलिक कार्यों में धन का व्यय होगा। गुरु एवं केतु का धन स्थान में गोचर अचानक धन प्राप्ति के योग बनाएंगे। आपके अंदर परस्पर सहयोग की भावना उत्तम रहेगी जो आपके धन लाभ में सहायक होगी।
घर-परिवार-समाज :
इस वर्ष परिवार में सुख शांति एवं प्रेम से मधुरता बनी रहेगी। गुरु आपके लिए बहुत अच्छा योग बना रहे हैं जो स्त्री सुख, विवाह, धन आगमन व संतान सुख कारक रहेंगे। माता-पिता का सहयोग मिलेगा। पत्नी से संबंधों में तनाव के साथ प्रेमपूर्वक भी रहेंगे। उच्च के शनि विवाह स्थान में गोचर कर रहे हैं अगर शनि कुंडली में अशुभ है तो वैवाहिक जीवन में तनाव उत्पन्न हो सकता है। आप विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से जुड़ेंगे एवं धार्मिक क्रिया-कलापों में धन व्यय करेंगे। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा।
स्वास्थ्य :
आपकी राशि का स्वामी मंगल पंचम भाव में व गुरु लग्न में आपके अच्छे स्वास्थ्य की ओर संकेत करते हैं। वर्ष के पूर्वार्द्ध में आपकी क्रियात्मक क्षमता एवं ऊर्जा उत्तम रहेगी। वर्ष के उत्तरार्ध में ज्योतिष, ध्यान, योग, तंत्र, मंत्र में आपकी रुचि रहेगी व इन विषयों में आप ज्ञान प्राप्त करेंगे। उच्च रक्तचाप, वायु विकार व पित्त विकार, आदि रोग की संभावना रहेगी। नियमित आहार लें व चिकित्सीय जांच करवाते रहें। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। दुर्घटना की संभावना बन सकती है। वजन पर नियंत्रण बनाए रखें। लाल वस्त्रों का प्रयोग न करें।
कैरियर एवं प्रतियोगी परिक्षाएं :
इस वर्ष आपके ज्ञान भंडार में वृद्धि होगी। राहु, केतु भी गुण विद्याओं में लाभकारी रहेंगे। राशि स्वामी मंगल का रोग स्थान में गोचर कुछ स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दे सकता है। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं तो भाग्य एवं मेहनत के बल पर उपलब्धि की संभावनाएं बन रही है। मंगल का सिंह में गोचर चिकित्सा, तकनीकी, वाणिज्य आदि क्षेत्र के लिए अनुकूल समय रहेगा। वकील, जज एवं कानून से जुड़े लोगों को विशेष लाभ का समय रहेगा। आप अपनी प्रतिभा के बल पर सम्मान पाएंगे। उच्च शिक्षा के इच्छुक विद्यार्थी अपनी पसंद के विषय में दाखिला लेने में सफल रहेंगे।
यात्रा-प्रवास-तबादला :
राहु का वृश्चिक राशि में अचानक धार्मिक यात्रा व प्रवास का कारक है। विदेश यात्रा के भी योग बनेंगे। परिवार जनों के साथ आनंददायक यात्राओं का भी आनंद उठाएंगे। सभी यात्राएं शुभ रहेंगी। इस वर्ष इच्छित स्थानांतरण के योग बनेंगे। घर परिवार से दूर रहकर नौकरी के लिए दूर प्रवास के भी योग बन सकते हैं। वर्ष के उत्तरार्द्ध में कार्य व्यसाय से संबंधित यात्राएं भी व्यस्तता बनाए रखेंगी।
धर्म-कार्य-ग्रह शांति :
स्वास्थ्य लाभ के लिए भगवान हनुमान जी की आराधना करें। केतु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए गणपति आराधना करें व बुधवार को सात पत्ती दुर्वा की गणेश जी पर चढ़ाएं। मुंगा रत्न स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी रहेगा। आप मंगलवार को शुक्ल पक्ष में मुंगा रत्न की अंगूठी सोने में बनवाकर अनामिका उंगली में धारण करें। शुभ अवसरों पर यज्ञ हवन का आयोजन आपको शुभ फल प्रदान करेगा। घर परिवार व कार्य क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। शुभ अवसरों पर यज्ञ, हवन का आयोजन आपको शुभ फल प्रदान करेगा। घर परिवार व कार्य क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। गुरुजनों एवं वृद्ध लोगों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। दान पुण्य एवं गुरुजनों व वृद्धों के प्रति आदर भाव रहेगा।
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