Pitri Paksha Special

Future Point's horoscope model Pitridosh Report(Birth Horoscope) which can be obtained from astrology Software Leostar Expert is the only horoscope model which gives Pitridosha analysis with its cause, effects and remedial measures. In Vedic astrology it is believed that if Pitri Dosha exists there in the horoscope of a native then it causes big havoc in the life of a native. Pitridosha has direct connection with the sins of our past life and 5th house in the horoscope. 5th house represents the sins of past life and therefore any affliction to 5th house, 5th lord and the Karaka of 5th results in Pitri Dosha where the native not only gets deprived of the blessings of ancestors but he also suffers from their wrath and eventually the bad results are obstacles in education, denial of marriage/issue comfort along with never ending struggle on all fronts.

Future Point's Horoscope Model Pitridosh Report(Birth Horoscope)


It is believed that when Pitrodosha is there in the life of a native then the blessings of Guru and God also get blocked. Actually 5th house is 9th from 9th (Destiny, blessings of ancestors, Gurus and Gods) therefore affliction to this house creates obstacles in destiny, blessings of God and ancestors. Even if a native has an excellent horoscope then also the favorable results are not obtained completely if it suffers from Pitridosha.

Anybody can know about his/her Pitri Dosha from Future Point's Pitridosha Report(Birth Horoscope) in which the symptoms, planetary combinations & other indications of Pitri Dosha are analyzed for everybody's horoscope and along with this the effective remedies are also recommended.

There are several planetary combinations which give birth to Pitri Dosha. For different types of Pitri Doshas different types of remedial measures are recommended. The initiatives taken in the direction of rectification of Pitri Dosha turn absolutely favorable if they are done in Pitri Paksha which is starting from 5th September 2017. All our readers are advised to take the blessings of ancestors by doing the suitable remedies in upcoming Pitri Paksha. Order your copy of Pitridosha Report(Birth Horoscope) from Future Point and get benefited by doing the remedies in Pitri Paksha which comes only once in a year.



Pitri Paksha Details


Shraadh or Pitri paksha, the "fortnight of the ancestors" is a 15–lunar day period when Hindus pay homage to their ancestors (Pitrs), through food offerings. The period is also known as Pitru Paksha & Pitri Pokkho.

Shraadh Dates 2017 (5th to 19th September)

  • 05th September - Purnima Shraddha
  • 06th September - Pratipada Shraddha
  • 07th September - Dwitiya Shraddha
  • 08th September - Tritiya Shraddha
  • 09th September - Chaturthi Shraddha
  • 10th September - Panchami Shraddha
  • 11th September - Shashthi Shraddha
  • 12th September - Saptami Shraddha
  • 13 September - Ashtami Shraddha
  • 14 September - Navami Shraddha
  • 15 September - Dashami Shraddha
  • 16 September - Ekadashi Shraddha
  • 17 September - Dwadashi, Trayodashi Shraddha
  • 18 September - Magha, Chaturdashi Shraddha
  • 19 September - Sarva Pitru Amavasya

The scriptures preach that a householder should propitiate ancestors along with the gods, ghosts and guests. Markandeya Purana says that if the ancestors are content with the shraddhas, they will bestow health, wealth, knowledge and longevity, and ultimately heaven and salvation (moksha) upon the performer.


आएगी घर खुशहाली और अपार समृद्धि - लाएं मरगज सामग्री अपने घर

भारतीय धर्मग्रंथों में ऐसा उल्लेखित है कि यदि देवी महालक्ष्मी का पूजन इन सामग्रियों के साथ तथा इनका उपयोग शास्त्रसम्मत विधि से किया जाये तो सभी अभीष्ट अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं। सभी सामग्रियां पूर्णत: शुद्ध हैं एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से निर्मित की गई हैं।

मरगज लक्ष्मी गणेश - छात्रों की बुद्धि कुशाग्र बनाएगा


भगवान श्री गणेश बुद्धि और शिक्षा के कारक ग्रह बुध के अधिपति देवता हैं। मरगज गणेश बुध के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है एवं नकारात्मक प्रभाव को कम करता है। मरगज गणेश के शुभत्व से व्यापार और धन में बढ़ोतरी होती है। यह संतान की शिक्षा में विशेष शुभ फलदायक होता है। मानसिक अशांति को कम करने में मदद करता है तथा श्री गणेश के प्रभाव से बच्चे की बुद्धि कुशाग्र होती है तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

  • सुख-शांति समृद्धि की प्राप्ति के लिए मरगज लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
  • इसकी शुभता से धन प्राप्ति, व्यापार वृद्धि, धन, ऋद्धि सिद्धि, कार्य में सफलता व आर्थिक स्थिति में उन्नति होती है तथा नियमित रुप से मरगज लक्ष्मी गणेश जी का पूजन करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर सदैव बनी रहती हैं।
  • मरगज लक्ष्मी गणेश और मरगज श्रीयंत्र की पूजा मिथुन एवं कन्या राशि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती हैं।
  • माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ साथ निम्न मंत्र का जाप हरी हकीक माला पर ७, ११, या १०८ बार करें।
    "ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:"


मरगज श्रीयंत्र - ऐश्वर्य और समृद्धि प्रदान करने वाली महाविद्या त्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी का सिद्ध यंत्र


आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति अतिशीघ्र समृद्ध बनना चाहता है। यह यंत्र सही अर्थों में यंत्रराज है। मरगज यंत्र को स्थापित करने का तात्पर्य श्रीयंत्र को अपने संपूर्ण ऐश्वर्य के साथ आमंत्रित करता होता है। इस अद्भुत यंत्र के अनेक लाभ हैं, इनमें प्रमुख हैं- मरगज श्री यंत्र की स्थापना मात्र से भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। घर पर मरगज श्री यंत्र नित्य पूजन करने से संपूर्ण दांपत्य सुख प्राप्त होता है। पूरे विधि-विधन से मरगज श्रीयंत्र पूजन यदि किसी अमावस्या रात्रि को संपन्न कर लिया जाए तो उस घर में सालभर किसी प्रकार की कमी नहीं होती है।

  • मरगज श्री यंत्र की पूजा अर्चना करने से ऋण और दरिद्रता से शीघ्र मुक्ति मिलती है।
  • व्यापार में उन्नति मिलती है।
  • बेरोजगारों को रोजगार मिलता है।
  • मरगज श्री यंत्र दुर्लभ यंत्रों की श्रेणी में आता है।
  • इसे मां लक्ष्मी की प्राप्ति हेतु अचूक प्रभावशाली माना गया है।
  • मरगज श्री यंत्र को विद्वानों ने स्वयंसिद्ध तथा सभी प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करने में सक्षम माना गया है।
  • मरगज श्री यंत्र पर ध्यान लगाने से मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है।
  • मरगज श्री यंत्र विविध वास्तु दोषों के निराकरण के लिए श्रेष्ठतम उपाय है।
  • मरगज श्रीयंत्र की निर्मलता के समान ही साधक का जीवन भी सभी प्रकार की मलिनताओं से परे हो जाता है।
  • श्रीयंत्र का पूजन करने के साथ साथ निम्न मंत्र का जाप हरी हकीक माला पर ७, ११ या १०८ बार करें।
    बुध मंत्र - ऊं चंद्रपुत्राय विद्महे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात

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