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बुध वक्री 2018

बुध ग्रह को ग्रहों में राजकुमार की उपाधि दी गई है लेकिन जन्म कुंडली में यदि बुध अशुभ ग्रहों के साथ है तो यह अशुभ होता है और यदि शुभ ग्रहों के प्रभाव में है तो यह शुभ फल प्रदान करता है। ऎसी स्थिति में इस ग्रह पर एक कहावत चरितार्थ होती है जो इस प्रकार है – गंगा गये गंगाराम और जमुना गये जमुनाराम। वैसे बुध को कई महत्वपूर्ण बातों का कारक ग्रह माना गया है जैसे – वाणी का कारक, बुद्धि का कारक, त्वचा का कारक, मस्तिष्क की तंत्रिका तंत्र का कारक आदि। इनके अलावा भी बहुत सी बातों का कारक है लेकिन यह मुख्य कारक है। व्यवसायिक दृष्टि से बुध बिजनेस का भी कारक है। नव ग्रहों में बुध, शुक्र, गुरु, शनि समय समय पर वक्री अवस्था में गोचरस्थ करते हैं। तथा राहु व केतु सदैव वक्री ही रहते हैं। इसके विपरीत सूर्य व चंद्र कभी भी वक्री नहीं होते हैं। आगे बढ़ने से पूर्व वक्री ग्रहों को समझ लेते हैं -

budh vakri 2018

वक्री ग्रह से अभिप्राय:

कोई भी ग्रह विशेष जब अपनी सामान्य दिशा की बजाए उल्टी दिशा यानि विपरीत दिशा में चलना शुरू कर देता है तो ऐसे ग्रह की इस गति को वक्र गति कहा जाता है तथा वक्र गति से चलने वाले ऐसे ग्रह विशेष को वक्री ग्रह कहा जाता है। उदाहरण के लिए शनि यदि अपनी सामान्य गति से कन्या राशि में भ्रमण कर रहे हैं तो इसका अर्थ यह होता है कि शनि कन्या से तुला राशि की तरफ जा रहे हैं, किन्तु वक्री होने की स्थिति में शनि उल्टी दिशा में चलना शुरू कर देते हैं अर्थात शनि कन्या से तुला राशि की ओर न चलते हुए कन्या राशि से सिंह राशि की ओर चलना शुरू कर देते हैं और जैसे ही शनि का वक्र दिशा में चलने का यह समय काल समाप्त हो जाता है, वे पुन: अपनी सामान्य गति और दिशा में कन्या राशि से तुला राशि की तरफ चलना शुरू कर देते हैं। वक्र दिशा में चलने वाले अर्थात वक्री होने वाले बाकि के सभी ग्रह भी इसी तरह का व्यवहार करते हैं।

वक्री ग्रह हमेशा अशुभ फल नहीं देते

वक्री ग्रह किसी भी कुंडली में सदा अशुभ फल ही प्रदान करते हैं क्योंकि वक्री ग्रह उल्टी दिशा में चलते हैं इसलिए उनके फल अशुभ ही होंगे। ज्योतिषियों का एक दूसरा वर्ग मानता है कि वक्री ग्रह किसी कुंडली विशेष में अपने कुदरती स्वभाव से विपरीत आचरण करते हैं अर्थात अगर कोई ग्रह किसी कुंडली में सामान्य रूप से शुभ फल दे रहा है तो वक्री होने की स्थिति में वह अशुभ फल देना शुरू कर देता है। इसी प्रकार अगर कोई ग्रह किसी कुंडली में सामान्य रूप से अशुभ फल दे रहा है तो वक्री होने की स्थिति में वह शुभ फल देना शुरू कर देता है। इस धारणा के मूल में यह विश्वास है कि क्योंकि वक्री ग्रह उल्टी दिशा में चलने लगता है इसलिए उसका शुभ या अशुभ प्रभाव भी सामान्य से उल्टा हो जाता है।

अगर कोई ग्रह अपनी उच्च की राशि में स्थित होने पर वक्री हो जाता है तो उसके फल अशुभ हो जाते हैं तथा यदि कोई ग्रह अपनी नीच की राशि में वक्री हो जाता है तो उसके फल शुभ हो जाते हैं। इसके पश्चात ज्योतिषियों का एक और वर्ग है जो यह धारणा रखता है कि वक्री ग्रहों के प्रभाव बिल्कुल सामान्य गति से चलने वाले ग्रहों की तरह ही होते हैं तथा उनमें कुछ भी अंतर नहीं आता। कुछ ज्योतिषियों का यह भी मानना है कि प्रत्येक ग्रह केवल सामान्य दिशा में ही भ्रमण करता है तथा कोई भी ग्रह सामान्य से उल्टी दिशा में भ्रमण करने में सक्षम नहीं होता। इतने सारे मतों और धारणाओं पर चर्चा करने के पश्चात आइए अब देखें कि किसी ग्रह के वक्री होने की स्थिति में उसके व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं।

बुध का वक्री होना शुभ या अशुभ

ज्ञान, विवेक, बुद्धि, धन-संपदा के कारक ग्रह बुध का जन्मकुंडली में वक्री होना कई तरह की शक्तियां प्रदान कर सकता है। वक्री बुध होने से व्यक्ति को छठी इंद्रिय जैसा ज्ञान प्राप्त होता है। वह समय से परे देखने की क्षमता हासिल करने और रहस्यमयी विद्याओं में रुचि रखने वाला होता है। जिन लोगों के जन्म के समय बुध वक्री होता है वे संकेत और अंतर्दृष्टि की भाषा समझने में निपुण होते हैं।

साल 2018 में बुध निम्न तिथियों को वक्री अवस्था में रहेगा

  • 23 मार्च से 15 अप्रैल 2018 के मध्य
  • 26 जुलाई से 19 अगस्त 2018 के मध्य
  • 17 नवम्बर से 07 दिसम्बर 2018 के मध्य

उपरोक्त तिथियों में बुध के वक्री होने पर, इससे मिलने वाले फल एक समान प्राप्त नहीं होंगे। आपके लिए वक्री बुध किस प्रकार का फल देने वाले हैं। यह आपकी जन्म राशि/लग्न से गोचरस्थ बुध की स्थिति पर निर्भर करता है। आईये जाने की आपको वक्री होने पर बुध किस प्रकार के फल देने वाले हैं-

मेष राशि

व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में तीव्र गति से कार्य करता है, लेकिन कई बार यही तीव्रता और उतावलापन इनके लिए नुकसानदेह हो जाता है। इस समय व्यक्ति बिना सोचे-समझे निर्णय ले लेते हैं और फिर नुकसान उठाते हैं।

वृषभ राशि

मनुष्य अपनी बुद्धि से बहुत अधिक धन अर्जित करता है। इनकी वाणी निर्मल होती है। साथ ही इस समय व्यक्ति दार्शनिक और आध्यात्मिक विषयों में रुचि लेता है। इस समय व्यक्ति रहस्यमयी विद्याओं में खूब नाम कमाता है।

मिथुन राशि

वक्री बुध की अवधि में व्यक्ति साहसी तो होता है, लेकिन उसे कोई भी कार्य करने के लिए परिश्रम अधिक करना होता है। पड़ोसियों से इनके विवाद होते रहते हैं।

कर्क राशि

समयावधि में व्यक्ति को सुख सुविधाएं सामान्य से अधिक मिलती हैं। यात्राओं और कम्प्यूनिकेशन के साधनों से कार्य पूरे होते हैं।

सिंह राशि

व्यक्ति को संतानों के सहयोग से लाभ मिलता है। धन, मान -सम्मान की प्राप्ति के संयोग बनते हैं।

कन्या राशि

व्यक्ति कुछ निराशावादी और चिड़चिड़ा रहता है।

तुला राशि

सप्तम में वक्री हो तो वैवाहिक जीवन में सुख-सहयोग की प्राप्ति होती हैं। व्यापारिक विषयों में व्यक्ति की बुद्धि अधिक रहती हैं।

वृश्चिक राशि

व्यक्ति अपनी बुद्धि गुप्त विद्याओं और परा विद्याओं को सीखने में लगाता है। अपने परिश्रम में देश-विदेश में कीर्ति अर्जित करने का प्रयास करता हैं। इस समय लॉटरी से अचानक धन प्राप्त होता है।

धनु राशि

व्यक्ति अपनी योग्यता और जानकारी का पूरा-पूरा लाभ उठाने का प्रयास करता है। उसके गुण उसके धनार्जन का साधन बनते हैं।

मकर राशि

संपत्ति से जुड़े विषयों पर इस अवधि में कार्य न करें। अन्यथा वाद-विवाद की स्थिति बनने की संभावना रहती है।

कुम्भ राशि

धन, और सम्मान की चिंताएं व्यक्ति को तनाव देती हैं। सब होते हुए भी वह सुख-सुविधाओं का आनंद नहीं ले पाता है।

मीन राशि

शत्रुओं को पराजित करता है। धार्मिक प्रवृत्ति और धार्मिक क्रियाकलाप घर में संपन्न होते हैं।

वक्री ग्रह का फल किस प्रकार जानें

किसी भी वक्री ग्रह का व्यवहार उसके सामान्य होने की स्थिति से अलग होता है तथा वक्री और सामान्य ग्रहों को एक जैसा नही मानना चाहिए। किन्तु यहां पर यह जान लेना भी आवश्यक है कि अधिकतर मामलों में किसी ग्रह के वक्री होने से कुंडली में उसके शुभ या अशुभ होने की स्थिति में कोई फर्क नही पड़ता अर्थात सामान्य स्थिति में किसी कुंडली में शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह वक्री होने की स्थिति में भी शुभ फल ही प्रदान करेगा तथा सामान्य स्थिति में किसी कुंडली में अशुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह वक्री होने की स्थिति में भी अशुभ फल ही प्रदान करेगा। अधिकतर मामलों में ग्रह के वक्री होने की स्थिति में उसके स्वभाव में कोई फर्क नहीं आता किन्तु उसके व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं। वक्री होने की स्थिति में किसी ग्रह विशेष के व्यवहार में आने वाले इन बदलावों के बारे में जानने से पहले यह जान लें कि नवग्रहों में सूर्य तथा चन्द्र सदा सामान्य दिशा में ही चलते हैं तथा यह दोनों ग्रह कभी भी वक्री नहीं होते। इनके अतिरिक्त राहु-केतु सदा उल्टी दिशा में ही चलते हैं अर्थात हमेशा ही वक्री रहते हैं। इसलिए सूर्य-चन्द्र तथा राहु-केतु के फल तथा व्यवहार सदा सामान्य ही रहते हैं तथा इनमें कोई अंतर नहीं आता। बुध ग्रह क्योंकि व्यक्ति की वाक शक्ति, बुद्धि, बौद्धिकता, निर्णय शक्ति, शिक्षा, व्यापारिक बुद्धि और बातचीत का कारक ग्रह है। अत: बुध के वक्री होने पर इन कारक वस्तुओं में बदलाव होने के संयोग बनते हैं।

बुध के वक्री होने पर निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-

1. व्यवहार में बदलाव

वक्री होने पर बुध के शुभ या अशुभ फल देने के स्वभाव में कोई अंतर नहीं आता अर्थात किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले बुध वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले बुध वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे किन्तु वक्री होने से बुध के व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं।

2. बातचीत और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित

वक्री बुध आम तौर पर कुंडली धारक की बातचीत करने की क्षमता तथा निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर देते हैं। ऐसे लोग आम तौर पर या तो सामान्य से अधिक बोलने वाले होते हैं या फिर बिल्कुल ही कम बोलने वाले।

3. वाणी में संयम की कमी

कई बार ऐसे लोग बहुत कुछ बोलना चाह कर भी कुछ बोल नहीं पाते तथा कई बार कुछ न बोलने वाली स्थिति में भी बहुत कुछ बोल जाते हैं। ऐसे लोग वक्री बुध के प्रभाव में आकर जीवन मे अनेक बार बड़े अप्रत्याशित तथा अटपटे से लगने वाले निर्णय ले लेते हैं जो परिस्थितियों के हिसाब से लिए जाने वाले निर्णय के एकदम विपरीत हो सकते हैं तथा जिनके लिए कई बार ऐसे लोग बाद में पछतावा भी करते हैं किन्तु वक्री बुध के प्रभाव में आकर ये लोग अपने जीवन में ऐसे निर्णय लेते ही रहते हैं। इन बदलावों के अतिरिक्त आम तौर पर वक्री बुध अपने सामान्य स्वभाव की तरह ही आचरण करता हैं।

4. बुध के वक्री होने पर निम्न उपाय करने से लाभ मिल सकता हैं-

इसके लिए बुध के मंत्र जाप करने चाहिए। सुबह अथवा शाम किसी भी समय में बुध के मंत्र जाप किए जा सकते हैं। बुध के मंत्र कई प्रकार है। श्रद्धालुओं को इन्हें अपनी सुविधानुसार करना चाहिए।

5. बुध गायत्री मंत्र

"ऊँ चन्द्रपुत्राय विदमहे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात "

6. बुध के तांत्रोक्त मंत्र

"ऊँ ऎं स्त्रीं श्रीं बुधाय नम:"

"ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:"

"ऊँ स्त्रीं स्त्रीं बुधाय नम:"

7. बुध का नाम मंत्र

"ऊँ बुं बुधाय नम:"

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